Sunday, July 24, 2011

ईश्वर दरिंदों को अपने आप फल देगा .....

तुम्हें जनम से अब तक
किसी ने पहचाना तो वोह है ,तुम्हारा  
ईश्वर  
भोला भाला चेहरा लिए
साधारण और सभ्य , भारतीय संस्कृति कूट कूट कर भरी है .
तुम में
और आज इन दरिंदों के बीच , तुम इतने समय घुट घुट कर जीती रहीं .
आदर्श का परिचय दिया !
पर तुम स्वछन्द और आधुनिक विचारों की न बन सकी.
घर की इज्जत की खातिर , बातों को  दहलीज़ भी पार  न करने दी .
अब भी देर नहीं बेटी , ईश्वर दरिंदों को अपने आप फल देगा
या
फिर किसी को निमित बना दरिंदों का नाश तो कर ही देगा .
डर , किसका ?? समाज का !!
कहाँ है यह समाज ?
जो औरत को जिल्लत की जिंदगी जीने को मजबूर करता हो !!
धिक्कार है , इस समाज को और उसके मुखोटे बदलते दरिन्दे !!
- डॉ. मुकेश राघव

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